पुणे शहर प्यार को बहुत धीरे-धीरे दिल में उतारता है।
यहाँ ना मुंबई जैसी भागदौड़ है, ना दिल्ली जैसा शोर।
बस बारिश से भीगी सड़कें, शाम की ठंडी हवा, छोटे-छोटे कैफ़े और कुछ अधूरी सी मुस्कानें।
ऐसी ही एक शाम थी।
एफ.सी. रोड रोशनी से चमक रहा था। बारिश अभी-अभी रुकी थी और सड़क पर जमा पानी में शहर की लाइट्स किसी सपने जैसी दिख रही थीं।
अवि सड़क किनारे खड़े होकर चाय पी रहा था।
ऑफिस से लौटते हुए वो अक्सर यहाँ रुक जाता था।
उसे लोगों को देखना पसंद था।
कौन हँस रहा है, कौन उदास है, कौन किसी का इंतजार कर रहा है।
तभी अचानक पीछे से किसी की आवाज़ आई —
“एक चाय मेरे लिए भी।”
अवि ने मुड़कर देखा।
हल्के गुलाबी कुर्ते में एक लड़की, भीगे बाल और चेहरे पर ऐसी मुस्कान… जो किसी भी खराब दिन को अच्छा बना दे।
“आप लाइन में नहीं थीं,” अवि ने मज़ाक में कहा।
“बारिश में rules थोड़े टूट जाते हैं।”
अवि हँस पड़ा।
“वैसे मैं अवि।”
“कियारा।”
दोनों चाय लेकर पास ही खड़े हो गए।
बारिश के बाद की ठंडी हवा चल रही थी।
सड़क पर लोग हँसते हुए गुजर रहे थे।
“पुणे नए आए हो?” कियारा ने पूछा।
“इतना obvious है क्या?”
“हाँ। पुराने लोग बारिश देखकर रुकते नहीं… enjoy करते हैं।”
“और तुम?”
“मैं तो बारिश में खो जाती हूँ।”
उस एक लाइन में कुछ ऐसा था… जिसने अवि को उसकी तरफ देखने पर मजबूर कर दिया।
उस दिन बस कुछ मिनट बातें हुईं।
लेकिन अगले दिन… फिर वही जगह, वही समय… और कियारा फिर मिल गई।
धीरे-धीरे ये रोज का हिस्सा बन गया।
कभी दोनों चाय पीते, कभी कॉफी, कभी बस बारिश देखते हुए घंटों बातें करते रहते।
कियारा बहुत अलग थी।
उसे छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी मिलती थी।
पुराने गाने, सड़क किनारे वाली चाय, बारिश में भीगना, और बिना वजह हँसना।
अवि, जो हमेशा जिंदगी को बहुत serious लेकर चलता था… अब थोड़ा हल्का महसूस करने लगा था।
एक शाम दोनों शनिवार वाड़ा के पास बैठे थे।
हल्की बारिश हो रही थी।
कियारा ने अचानक पूछा —
“तुम्हें कभी किसी से प्यार हुआ है?”
अवि कुछ पल चुप रहा।
“शायद नहीं।”
“शायद?”
“क्योंकि असली प्यार कैसा होता है… पता नहीं था।”
“और अब?”
अवि ने उसकी तरफ देखा।
“अब थोड़ा समझ आने लगा है।”
कियारा मुस्कुरा दी।
लेकिन उसकी आँखों में कहीं हल्की उदासी भी थी।
अवि ने notice किया… लेकिन कुछ पूछा नहीं।
दिन गुजरते गए।
अब पुणे का हर कोना उनकी कहानी का हिस्सा बन चुका था।
एफ.सी. रोड, वैषाली कैफ़े, सिंहगढ़ की बारिश, देर रात की बाइक राइड्स।
अवि को अब हर सुबह सिर्फ एक मैसेज का इंतजार रहता था —
"उठ गए?"
लेकिन खुशियाँ कभी हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
एक रात कियारा बहुत चुप थी।
“क्या हुआ?” अवि ने पूछा।
कियारा ने नजरें झुका लीं।
“मुझे वापस जाना होगा।”
“कहाँ?”
“बैंगलोर।”
अवि का दिल अचानक भारी हो गया।
“कब?”
“अगले हफ्ते।”
कुछ देर दोनों के बीच सिर्फ बारिश की आवाज़ थी।
“और हम?” अवि ने धीमे से पूछा।
कियारा की आँखें भर आईं।
“कभी-कभी जिंदगी प्यार से पहले जिम्मेदारियाँ रख देती है।”
अवि पहली बार समझा… डर कैसा लगता है।
अगले कुछ दिन दोनों कम मिले।
शायद दोनों दूरी के लिए खुद को तैयार कर रहे थे।
फिर वो आखिरी शाम आ गई।
तेज बारिश हो रही थी।
दोनों उसी चाय वाले के पास खड़े थे जहाँ पहली बार मिले थे।
कियारा ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा —
“याद है पहली मुलाकात?”
अवि हँस पड़ा।
“हाँ… तुमने लाइन तोड़ी थी।”
“और तुमने दिल।”
दोनों हँसते-हँसते चुप हो गए।
बारिश लगातार गिरती रही।
कियारा ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।
“अगर किस्मत ने चाहा… तो हम फिर मिलेंगे।”
अवि ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —
“पुणे इतनी खूबसूरत कहानियाँ अधूरी नहीं छोड़ता।”
कियारा कुछ नहीं बोली।
बस उसे गले लगा लिया।
उस रात बारिश बहुत देर तक होती रही।
लेकिन पहली बार अवि को बारिश उदास नहीं लगी।
क्योंकि उसे यकीन था —
कुछ प्यार दूर होकर भी खत्म नहीं होते।
वो बस पुणे की बारिश में कहीं रुक जाते हैं…
फिर एक दिन वापस लौट आने के लिए।